बेपनाह इश्क़ के अस्रार की कसक,

अब तलक है दिल में तेरे प्यार की कसक।


जनिबे मंज़िल चला हर एक कदम के साथ,

एक-एक कदम पे तुम दिखी अस्रार की तरह।


तफ़सील से बताऊँ लम्बे सफ़र के राज़,

आ बैठ मेरे पास किसी हमराज़ की तरह।


सारे राह तुम थी हम छाँव की तरह,

बढ़ते रहे कदम हमारे इश्क़ के गाँव की तरफ़।


जो मिला नहीं कभी भी अस्रार की तरह,

पलती रही थी दिल में एक बेकरार सी कसक।


कोशिश तो मेरी थी बेपर्दा हो उलझने,

सब “राज़” रह गया तेरे अस्रार की तरह।