हवाएँ मीठी मीठी महकने लगीं

जब ज़िक्र तेरा हुआ

मेरे मन की महफ़िल में

बजने लगा मधुर सितार


नज़र गई आसमान तक

तो देखा सितारे टिमटिमाते

जश्न वो भी मनाने लगे थे

हमारे प्रेमोत्सव का


चहचहाने लगी चिरैया

गाने लगे थे झींगुर

एक्वेरियम में

छोटी-छोटी मछलियाँ

फुदकने लगीं थीं


नाचने लगे थे बुलबुले

पानी का रंग नीला

कुछ गाढ़ा हो गया था

हमारे प्यार की तरह

गाढ़ा, बहुत गाढ़ा