मोह से परे


मोह से परे जो एक संसार होगा,

जाने कौन से क्षितिज के पार होगा।

प्रेम, क्रोध, लोभ, हर्ष, व्यथा से दूर,

कैसा सूना बेरंग वो संसार होगा।


सागर की लहरों के शोर तज,

तुम्हें जाना उसी के पार होगा।

एकाकी का ही सफर है साथी,

हमसफ़र कोई ना तैयार होगा।

कैसा सूना बेरंग वो संसार होगा।


ना साकी, ना प्याले होंगे,

ना नैना वो मतवाले होंगे।

ना दिलों के सौदे होंगे,

ना जज़्बातों का व्यापार होगा।

मोह के परे जो एक संसार होगा,

कैसा सूना बेरंग वो संसार होगा।