हिसाब होगा

वो कहते हैं,


“जाओगे तुम दोज़ख़ में, काफ़िर,

”
ये कहते हैं,


“नर्क नसीब होगा तुम्हें, विधर्मी।”


अंततः यही होता है,


यकीनन यही होगा।


हिसाब होगा सब पापों का,


हर गुनाह गिना जाएगा।


जितने सिर काटे गए,


जितनी गुंबदें ढहाई गईं,


जितने बुतख़ाने तोड़े गए,


ईश्वर के नाम पर किए



हर जुल्म का हिसाब होगा।


हर आँसू की बूँद गिनी जाएगी,


उन बलात्कारों का हिसाब होगा,


जो लिखे गए या अनगिनत रह गए।


उन लाशों का भी हिसाब होगा,


जो दरिया में बहा दी गईं,
‘

लावारिस’ कहकर जला दी गईं।




यकीन मानो,

हिसाब होगा—


मज़लूमों पर हुए हर सितम का,


बुलडोज़र से टूटते सपनों का।


यकीनन यही होगा,


यही सत्य है।


ईश्वर एक ही है,


नर्क और दोज़ख़ भी एक ही हैं।