काॅल का इंतज़ार's image
Love PoetryPoetry1 min read

काॅल का इंतज़ार

KuraajKuraaj December 12, 2021
Share0 Bookmarks 43920 Reads1 Likes
आज रात भर जगकर एक सुनहरा ख्वाब देखा है
इन मसलती आँखों से पहली बार ढलता महताब देखा है
आज हवाओं मे नई महक आई है
सूरज ने सालों बाद लाली दिखाई है
आज उबासियों की जगह अंगड़ाईयों का मन है
आज हर एक चेहरा खिलता चमन है
आज फोन हाथों से छूट नही रहा है
ख्यालों से ये क़सीदा टूट नही रहा है
आज आलस और देर तक सोना सब ना-ग़वार है
बस तेरी कॉल का इन्तज़ार है।

आज कोई सुनहर

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts