दे गाली भर प्याली
जिंदगी खेल ही तो है बजा ताली
दिल जो टूटे टूटने दे
कोई रूठे रूठने दे
खेल ही तो हो रहा है
तू कहाँ कुछ खो रहा है
ये भरम है तेरे मन का
क्या करेगा इतने धन का
आया गया तू ध्यान न दे
भारी भरकम ज्ञान न दे
खेल में हो जा मगन तू
आनंद का छू ले गगन तू
वक़्त पल पल जा रहा है
अंत पल पल आ रहा है

