ख़ून से अपने सींचा मॉ, अहसास रगों में दौड़ाया तेरी साँसों के स्पर्श से, ले जीवन धरती पर आया। कच्ची माटी को घड़ा माँ तूने, हाथों से अपने सहलाया फिर दे के सहारा हाथ पकड़ , मुझको था चलना सिखलाया। तेरी ममता भरी दुआएँ , रह भूखी मुझे खिलाया माँ आँचल की ठंडी छाओं में, ख़ुद जागी मुझे सुलाया माँ । हर श्वास में तेरे आशीषें हैं, हर नज़र से मुझे बचाया माँ काँटा भी न चुभने पाये कोई, हर मुश्किल से बचाया माँ । मज़हब तो बहुत हैं दुनिया में , माँ सा मज़हब न पाया है प्रेम , त्याग , निस्वार्थ भाव, माँ की सूरत में पाया है। क्यों जाऊँ मंदिर मस्जिद मैं , क्यों पूजूँ कोई मूरत मैं तेरे चरणों में बसता ज़हान, तू ईश्वर की है मूरत माँ ।