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वर्षा


वर्षा अपने बाद लाती है कुछ अल्पकालिक परिवर्तन ,मैदानों में निकल आती हैं बीरबहूटियाँ ,

टर्रानें लगते हैं मेंढक समवेत स्वर में ,लग आते हैं चींटियों के पर ,

उग आते हैं कुक्कुरमुत्ते ,पर सभी थोड़े समय के लिए ,

— राजीव "हैरान"
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