तुम कौन हो ....?

रात का अँधेरा उलीच कर ,

उजास फैलाते हो धरा पर ,

बादलों से जल लेकर ,

सींचते हो हर एक तरु को ,

प्रकृति से हेमन्त लाकर ,

सुरभित करते हो पुष्पों को ,

तुम कौन हो ....?

सहलाते हो स्नेह से ,

मानव के मन को ,

थके पथिक की ,

हर लेते हो क्लांति ,

जिग्यासु मनु मनीषियों को ,

देते हो ग्यान ,

जो देते हो आक्रान्त को ,

अभयदान ।

तुम कौन हो ....?

- राजीव " हैरान "