नयनों ने तेरे रंग लिया नील गगन से ।
आँचल नें हलचल पायी मलय पवन से ।
तेरे तन नें सुरभि पायी नील कमल से ।
अलकों नें वर्ण है पाया मेघों के दल से ।
तुम को मन का उल्लास मिला है पर्वों से ।
तुम को स्वर का विकास मिला है गन्धर्वों से ।
- राजीव "हैरान"


नयनों ने तेरे रंग लिया नील गगन से ।
आँचल नें हलचल पायी मलय पवन से ।
तेरे तन नें सुरभि पायी नील कमल से ।
अलकों नें वर्ण है पाया मेघों के दल से ।
तुम को मन का उल्लास मिला है पर्वों से ।
तुम को स्वर का विकास मिला है गन्धर्वों से ।
- राजीव "हैरान"