जरासीम फैले हवाओं मेंं रहे ,

सब लोग अपने ठिकानों में रहे ,

कुछ बेघर से रास्तों पर चलते रहे ,

तुम महफूज़ मेरे दिल की पनाहों में रहे ।

- राजीव "हैरान "