अपनी बेगुनाही की ,
ना तस्दीक करो ।
खुद को संभालो ,
हुलिया भी जरा ठीक करो ।
रेत का तूफान ,
चाँद को नहीं मैला करता ।
अपने जज्बातों के ,
तवाजुन को जरा ठीक करो ।
- राजीव " हैरान "


अपनी बेगुनाही की ,
ना तस्दीक करो ।
खुद को संभालो ,
हुलिया भी जरा ठीक करो ।
रेत का तूफान ,
चाँद को नहीं मैला करता ।
अपने जज्बातों के ,
तवाजुन को जरा ठीक करो ।
- राजीव " हैरान "