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तलाश


हमें शिद्दत से थी पानी की तलाश ,लोग पूछते थे दरिया का पता ।

हम खुद पर शर्मिंदा थे बहुत ,बताओ उनको जवाब हम क्या देते ।

— राजीव "हैरान "
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