जमाने को नाज था ,
उसकी वफ़ा पर ।
उसको भी गुरूर था ,
हमेशा साथ रहने पर ।
साया था , अँधेरा हुआ ,
बस , साथ छोड़ गया ।
- राजीव "हैरान"


जमाने को नाज था ,
उसकी वफ़ा पर ।
उसको भी गुरूर था ,
हमेशा साथ रहने पर ।
साया था , अँधेरा हुआ ,
बस , साथ छोड़ गया ।
- राजीव "हैरान"