आज बागबां तन्हा ,
चमन वीरान सा क्यूँ है ?
गम में डूबा हुआ ,
हर जिक्रो बयां क्यूँ है ?
पलक है बोझिल बोझिल सी ,
नदारद शोखियाँ क्यूँ हैं ?
हवा हैं नाजो अदा सारे ,
यों गम जदा क्यूँ है ?
जरा मुड़कर पीछे देख ,
चमन अब भी है पुररौनक ,
जरूरत है फकत इतनी ,
गफलते माजी ना दोहराना ।
- राजीव " हैरान "

