जहां को नाज था ,उसकी मुस्कुराहट पर ।उसे भी फख्र था ,अपनी महक पर ।फूल था वो ,खिलकर बिखर गया ।
जहां को नाज था ,उसकी मुस्कुराहट पर ।
उसे भी फख्र था ,अपनी महक पर ।
फूल था वो ,खिलकर बिखर गया ।