मुश्किल है तसव्वुर बिना चाँद के शब का ,

पर इक रात बिना चाँद भी जरूरी है ।

दामन बचाते हो तुम जमाने से ,

इस बात की तफ़सीलात नहीं जरूरी हैं ।

तुम क्यों किनारा कर जाते हो हमसे भी ,

सड़क के मोड़ पर मुलाकात भी जरूरी है ।

- राजीव " हैरान "