तुम्हारी नब्ज़ में रहती है ,

धड़कन मेरी ।

ख्याल खुद का रखोगे ,

तो जी लूँगा ।

तुम मुस्कुरा कर जो देख लो ,

मेरी जानिब ।

मैं मसर्रत का छलकता

जाम पी लूँगा ।

मेरी मस्ती नहीं मोहताज़ ,

जमाने की ।

मय नजरों से तेरी ,

जान मेरी पी लूँगा ।

- राजीव " हैरान। "