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मकबूलियत


अशार लिखे ,कोई दाद ना आई ,फरियाद की , कोई आवाज़ ना आई ।

ये मै भी अजीब चीज है साकी ,रिन्द हुआ तो चर्चे आम हो गए ।

— राजीव " हैरान "
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