बडा़ गुरूर था उसको ,हुस्न पर अपने ।शायर उसपर ,गजल लिखते थे ।माहताब था वो ,अमावस मेंं खो गया ।
बडा़ गुरूर था उसको ,हुस्न पर अपने ।
शायर उसपर ,गजल लिखते थे ।
माहताब था वो ,अमावस मेंं खो गया ।