हर अफ़साना हकीक़त नहीं होता ।
किरदारों का तिलिस्म है , कोई तमाशा नहीं होता ।
हर किरदार की फ़ितरत अलग होती है ।
हर शख्स का काम शराफ़त नहीं होता ।
- राजीव "हैरान"


हर अफ़साना हकीक़त नहीं होता ।
किरदारों का तिलिस्म है , कोई तमाशा नहीं होता ।
हर किरदार की फ़ितरत अलग होती है ।
हर शख्स का काम शराफ़त नहीं होता ।
- राजीव "हैरान"