जैसी खामोशी से,

चाँद आकाश मैं उतरा ।

जैसी खामोशी से ,

कलियाँ चटकीं ।

जैसी खामोशी से ,

रात से दिन निकला ।

उसी खामोशी से ,

वो दिल में आए ,

मुस्कुराए ,और

वहीं पर बस गए ।

- राजीव " हैरान "