हम रात भर इस कशमकश मेंं रहे ,

करवट बदलते जागते , उनींदे से रहे ,

कि पूरा तेरे जमाल में लिखा अशार कब होगा ,

सुबह तो हो जाएगी करवटें बदलते ,

पर जाने तेरा दीदार कब होगा ।

- राजीव "हैरान"