बड़ा गुरूर था उसको , अपने करिश्मे पर ।
बढ़ा सकता था हुस्न , हसीनों को नाज़ था उसपर ।
कर सकता था दामन दागदार , शरीफ़ डरते थे उससे ।
काजल था बस , आँसुओं में बह गया ।
- राजीव "हैरान"


बड़ा गुरूर था उसको , अपने करिश्मे पर ।
बढ़ा सकता था हुस्न , हसीनों को नाज़ था उसपर ।
कर सकता था दामन दागदार , शरीफ़ डरते थे उससे ।
काजल था बस , आँसुओं में बह गया ।
- राजीव "हैरान"