जो खुद में कैद होते हैं ,वो कब आजाद होते हैं ।

जो हैं तब्बसुम के दीवाने ,तन्हाई में रोते हैं ।

गुलों को रौंदने वाले ,जलीलोखार होते हैं ।

खिजां की चाहतें करके , चमन आबाद होते हैं ।

- राजीव "हैरान "