चाँद हो , नूर हो ,खुशबू हो, ए मेरे हबीब ।
चाहत हो मेरी जो हरदम क़रीब रहती है ।
मुहब्बत में गुलों के कातिल मत होना ।
बिछुड़ कर डाली से ये मर जाते हैं ।
तेरे जलवों की महक मुझको हरदम नसीब रहती है ।
- राजीव " हैरान "


चाँद हो , नूर हो ,खुशबू हो, ए मेरे हबीब ।
चाहत हो मेरी जो हरदम क़रीब रहती है ।
मुहब्बत में गुलों के कातिल मत होना ।
बिछुड़ कर डाली से ये मर जाते हैं ।
तेरे जलवों की महक मुझको हरदम नसीब रहती है ।
- राजीव " हैरान "