गुलों की हिफाज़त सर ले लो ,
अगर कहते हो मुर्शिद हो ।
गुलों के खार तुम ले लो ,
अगर कहते हो बिस्मिल हो ।
गुलों से इश्क तुम कर लो ,
अगर कहते हो आशिक हो ।
गुलों को मुहब्बत में ,
तुम तोड़ मत लेना ।
बिछुड़कर अपनी डाली से ,
ये दम तोड़ देते हैं ।
- राजीव " हैरान "

