ना हमसफर है कोई , ना कोई कहबीब मेरा ,

ना बेवफा है कोई , ना कोई रकीब मेरा ,

हवा का एक झोंका , कुदरत के रंग में रंगा हूँ ,

झूम के चल रहा हूँ , ये है नसीब मेरा ।

- राजीव "हैरान"