भीड़ , भगदड़ में कोई नहीं देखता ,

आव , ताव ,चोट और घाव ,

जब तुम तुम ही रहोगे ,

तो कौन देखेगा ,भाव ,

भावना और घाव ,

इस भीड़ से ,

कुछ कम हो जाओ ,

कुछ दूर साथ चलो ,

मैं से हम हो जाओ ।

- राजीव " हैरान "