नहीं जानता, धूप और छाँव को ।नहीं जानता आश्रय और ठाँव को ।जानता हूँ पगडंडियों और अपने नंगे पांव को ।जानता हूँ आज भी मैं अपने गाँव को ।
नहीं जानता, धूप और छाँव को ।नहीं जानता आश्रय और ठाँव को ।
जानता हूँ पगडंडियों और अपने नंगे पांव को ।जानता हूँ आज भी मैं अपने गाँव को ।