पेड़ों की फुनगियों से झाँकती ,

फूलों के चेहरों को चूमती ,

गुलाबों की खुशबू से महकती ,

कुनकुनी धूप ओढ कर चलती ,

पंछियों की चहचहाहट में बोलती ,

अलसाए मन में फुर्ती घोलती , एक सुबह ।

- राजीव "हैरान"