तरन्नुम सा चहकती हो ,गजल सा गुनगुनाती हो ,एहसासे बहार होता है ,जो नजदीक आती हो ,हमें तुम गैर रहने दो ,क्यों अपना बनाती हो ,सुना है गम जुदाई का ,बहुत तकलीफ देता है ।
तरन्नुम सा चहकती हो ,गजल सा गुनगुनाती हो ,
एहसासे बहार होता है ,जो नजदीक आती हो ,
हमें तुम गैर रहने दो ,क्यों अपना बनाती हो ,
सुना है गम जुदाई का ,बहुत तकलीफ देता है ।