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एहसास


तरन्नुम सा चहकती हो ,गजल सा गुनगुनाती हो ,

एहसासे बहार होता है ,जो नजदीक आती हो ,

हमें तुम गैर रहने दो ,क्यों अपना बनाती हो ,

सुना है गम जुदाई का ,बहुत तकलीफ देता है ।

— राजीव " हैरान "
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