आँचल में भरकर ढ़ो रहे हैं वो ,
अपना भी ग़म , मेरा भी ग़म ।
दिल में समंदर दर्द का लिए पर ,
आँखों में झलके कम , बहुत कम ।
दिल में संजोए गीत प्यार के पर ,
ओठों से छलके कम , बहुत कम ।
करीब हैं मेरे दिल के कितने ,
मेरे दिलबर , मेरे हबीब , मेरे सनम ।
- राजीव " हैरान "

