ना चरागों में रौशनी है ,
ना फूलों में महक ।
ना रास्तों पर रवानी है ,
ना बाजारों में रौनक ।
बेमकसद गुजर रही है जिन्दगी ,
कभी ये कहेंगे कि ,
एक ऐसा भी दौर गुजरा है ।
- राजीव " हैरान "


ना चरागों में रौशनी है ,
ना फूलों में महक ।
ना रास्तों पर रवानी है ,
ना बाजारों में रौनक ।
बेमकसद गुजर रही है जिन्दगी ,
कभी ये कहेंगे कि ,
एक ऐसा भी दौर गुजरा है ।
- राजीव " हैरान "