न झोंपडी मेंं रहता है , न महल में ,

दर्द रहता है इन्सान के दिल में ,

जब कभी नाकाबिले बर्दाश्त हो जाए ,

बाँटना किसी अपने के साथ इसको ,

ना करना इसका जिक्र कभी महफ़िल में ।

- राजीव " हैरान "