ज्यों गहराती है रात ,

जागते हैं जंगल , दरिन्दे ,

सो जाते हैं परिन्दे ,

सो जाते हैं गाँव, शहर ,

अलसा जाते हैं तारे ,

सजग हो जाते हैं ,पहरुए ,

बढ़ जाता है नजर का पैनापन ,

जागते रहते हैं बाड़ और बिजूका ,

जब परिन्दे चहचहाते हैं ,

तारे सो जाते हैं ,

दरिन्दे छिप जाते हैं ,

शहर, गाँव , किसान , जागते हैं ,

पहरुए साधते हैं लक्ष्य ,

तब भी जागते रहते हैं ,

बाड़ और बिजूका ।

- राजीव " हैरान "