खिजां के खौफ़ से हैरां ,

गुल कभी झड़ नहीं जाते ,

शाख़ों पर लगे पत्ते ,

पीले पड़ नहीं जाते ,

गर ऐसा हो जाता ,

चमन चुक गया होता ,

रौनक़ सब चली जाती ,

वीराना रुक गया होता ,

खिजां की रुखसती के बाद ,

बहारें लौट आती हैं ,

शायद जानती हैं वो ,

कि बदी मेंं दम नहीं होता ,

आँधी के बवण्डर से ,

चाँद धुंधला दिखे कुछ पल ,

पर इससे चाँद का दर्जा ,

जरा भी कम नहीं होता ।

- राजीव " हैरान "