शफ़क़ के तारे छूने का ,
ये जो अरमान पाले हो ।
बेवजह जिन्दगी अपनी ,
किस आफ़त में डाले हो ।
हसरतें इस तरह की ,
कभी पूरी नहीं होती ।
परवाना जलकर मरता है ,
शमां बिल्कुल नहीं रोती ।
- राजीव ' हैरान '
।


शफ़क़ के तारे छूने का ,
ये जो अरमान पाले हो ।
बेवजह जिन्दगी अपनी ,
किस आफ़त में डाले हो ।
हसरतें इस तरह की ,
कभी पूरी नहीं होती ।
परवाना जलकर मरता है ,
शमां बिल्कुल नहीं रोती ।
- राजीव ' हैरान '
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