"आओ संभाले वाणी को" वाणी का सब खेल है,वाणी से सब दाँव मधुर होवे तो जीत गए,नहीं तो होवे घाव।। सत्य सदा ही बोलिये, सत्य की होती जीत सत्य भाषण वाले को,मिलती जग से प्रीत।। वचन मुख से बोलिये, हितकर और परिमित वचन में ऐसा जादू है,शत्रु होवे मीत।। शब्द ऐसे बोलिए, जैसे मिश्री के घोल बुद्धिमान की पहचान है,तोल मोल के बोल।। शब्द भाषा का अंग है,भाषा अभिव्यक्ति का द्वार शब्द वैसे ही होते है,जैसे होते विचार।। वचन में संयम राखिये, वचन संबंधों का आधार वचन से यह टिके रहे,नहीं तो बंटाधार।। वाणी ऐसा संगीत है,कर दे मन झंकृत मधुर मृदु वाणी से,करिए कंठ अलंकृत।। अच्छी वाणी गुण प्रथम,पूजे सब नरनार विकथा कड़वी बातों का,सदा करो परिहार।। कहे "रजत" मीठी वाणी से,होता मैत्री विस्तार मैत्री,प्रेम, स्नेह ही,जीवन के है सार।। || रजत चोपड़ा ||