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दर्द जब हद से भी पार हो जायेगा

मोह मत कर पक्षी इन तिनकों के घोंसलों का

तेज हवा आएगी तो सपनों का घर भी टूट जायेगा

ये जो मेरा, प्यारा, हमारा किया करते हो

वक्त पड़ने पर इनका सहारा भी छूट जायेगा

फिर तुम्हें अपनी बातों को सबसे छिपाना होगा

जो लोग तुमसे सुनना चाहें उन झूठी बातों को बताना होगा

ये जो बहाने दे देते हो खुद को

इन बहानों को आपने मन से मिटाना होगा

दर्द जब तुम्हारी हद से गुजर जाएगा

आंसुओं का समंदर आंखों से बिखर जायेगा

आंसुओं की धारा को खुद से भी छिपाना होगा

तुझे तेरी कहानी का हर किरदार निभाना होगा

वक्त की

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