ताप तो आती होगी तुम तक

मेरे मन की ज्वालाओं पर

नयनों से गिरते उन

अश्रु रुधिर की

भाप तो आती होगी

मेरे शब्दों में भावों में

उन उलझी सी राहों में

पग पग चलने की हल्की सी

थाप तो आती होगी

मेरा जीवन दर्शन मेरा

दिवास्वप्न में घोल अंधेरा

पर कुछ किरनें छन छन कर

शशि की तुम तक

पहुंच तो जाती होगी।

राजवर्धन जोशी

(are jay)