ले चली मजधार नैयाआर है न पारसागर की हिलोरों सेछिटक कर बह गई पतवारनाविक जोहता है किनारेसहारे बाजुओं औरआस है एक दिनदिशा मिल जायधारा संग पवनबह चले फिरमिल जायनैया को किनारा।राजवर्धन जोशी