क्या फिर कोई गुलशन

उजड़ने वाला है

शाख पर गिध्दों ने

डेरा डाला है

बुलबुले कोयलें

सब छिप गयीं

जाने कहाँ

हर दरख्त

सय्याद ने

फंदा मारा है।

राजवर्धन जोशी

(are jay)