हुस्न तरबतर हो गया
पसीने से
आशिक एक हो गया
लिपट के सीने से
झूम के आ गया सावन
बरस गये बादल
शायर बस देखता रह गया
करीने से।
राजवर्धन जोशी
(are jay)


हुस्न तरबतर हो गया
पसीने से
आशिक एक हो गया
लिपट के सीने से
झूम के आ गया सावन
बरस गये बादल
शायर बस देखता रह गया
करीने से।
राजवर्धन जोशी
(are jay)