मजदूर
रूकता चलता,
थकता रूकता,
मीलों पैदल
बोझिल कदमों से,
उम्मीद उठाये,
आश लगाये,
रूकता चलता
थकता रूकता,
खुद से लड़ता
सिसकता खुद से,
सिमटता खुद में
पिसता पाटो में,
रहता वहीं,
रूकता चलता
थकता रूकता
राज शेखर सिंह


मजदूर
रूकता चलता,
थकता रूकता,
मीलों पैदल
बोझिल कदमों से,
उम्मीद उठाये,
आश लगाये,
रूकता चलता
थकता रूकता,
खुद से लड़ता
सिसकता खुद से,
सिमटता खुद में
पिसता पाटो में,
रहता वहीं,
रूकता चलता
थकता रूकता
राज शेखर सिंह