अंधेरे को हटाओ दूर
होने दो उजाला
बिना जिसके
अधूरी जिन्दगी जीनी पड़ेगी
नहीं सूरज का,च॔दा का,सितारों का
कभी दीदार होगा ।
न र॔गों की कोई पहचान होगी
महकते फूल,पत्ते,पेड़ जिसकी डाल पर
झूला पड़ेगा,गीत गूंजेंगे ।
देख पाना अप्रतिम सौंदर्य
नारी का,प्रकृति का
हो सकेगा क्या भला स॔भव
उजाले के बिना?
सिर्फ आवाजों को सुन कर
हाथ से छूकर अंधेरे में
किस तरह स॔पूर्णता से
जान पाओगे किसी को
व्यक्ति को या वस्तु को या और कुछ भी?
इसलिए आओ चलें आह्वान कर लें
करें स्वागत उस उजाले का
जो तम का नाश कर दे।


