जनता कर चुकाती है

सरकार योजनाएं बनाती है

निविदाएं,ठेकेदार, कमीशन

अनेक ऐसे कठिनाई भरे मार्गों को तय कर

जनहित के कार्य पूरे हो पाते हैं।

शिलापट्टों पर विधाचकों, सांसद के नाम

शोभायमान होने लगते हैं।

विवाद होता है कि किसका नाम बड़े अक्षरों

और किसका छोटे आकार में अंकित है

उट्घाटन की तारीख टाल दी जाती है।

जनता को अगली तिथि की,

जब सब सही हो जाए,

प्रतीक्षा करनी होती है बस

एक दिन किसी के करकमलों द्वारा

निर्माणकार्य राष्ट्र को समर्पित हो जाता है।

जनता गदगद् होकर तालियाँ बजाती है।