शीत ऋतु का आगमन, है स्वागतम्
देह में में सिहरन, हवाएं कंपकंपाती
यह सुखद अनुभव अनिर्वचनीय है।
गुनगुनी सी हल्की हल्की धूप
तन मन तृप्त हो जाता है इसकी आंच से
कुछ न कर अलसाए बैठें,
हाथ में चाय का कप साथ में अखबार।


शीत ऋतु का आगमन, है स्वागतम्
देह में में सिहरन, हवाएं कंपकंपाती
यह सुखद अनुभव अनिर्वचनीय है।
गुनगुनी सी हल्की हल्की धूप
तन मन तृप्त हो जाता है इसकी आंच से
कुछ न कर अलसाए बैठें,
हाथ में चाय का कप साथ में अखबार।