आजकल कुछ नहीं हो रहा है
आजकल बहुत कुछ हो रहा है
कोई चीखता चिल्लाता है
कोई ताली बजाता है।
कहीं कोई डर रहा है
कहीं कोई मर रहा है
कोई ह॔सता ठठाता है
कोई बस मुस्कराता है।
यहां कानून का डर है
हमारा छोटा सा घर है
वहां महलों में रहते हैं
वे हम पर त॔ज कसते हैं ।
धमकियांऔर पिटवाने की बातें
कभी ड॔डे कभी घूंसे या लातें
यही हालात उन सबके नहीं हैं
वे हैं औकात वाले हम नहीं हैं।
बड़ी की भूल जो कर ली पढ़ाई
बिना मतलब जमा पूंजी ग॔वाई
अगर चमचे बने होते चमकते
जो करते जी हजूरी आ धमकते ।
तभी अपना कोई जलवा तो होता
कभी पूरी कचौरी या कभी हलवा तो होता
अभी तो रोटी चावल दाल के लाले पड़े हैं
बड़े बेशर्म हैं जिन्दा खड़े हैं।


