मेरे जीवन में थीं उलझनें इस कदर
प्यार के गीत गाना अस॔भव लगा।
कैसे बीते हैं दिन, रातें कैसी कटीं
यह किसी को बताना अस॔भव लगा।
हर कदम जो उठाया मिली ठोकरें
दर्द पीता गया और जीता गया।
मैंने कोई शिकायत किसी से न की
राह आसान पाना असंभव लगा।
जिनकी किस्मत में थी वो खुशी पा गए
कोशिशों से भी न मुझको सफलता मिली।
मैं अकेले भटकता रहा दर बदर
कोई साथी बनाना अस॔भव लगा।
कोई महफ़िल नहीं, कोई मंजिल नहीं
फिर किसी का भी क्यों वक्त बर्बाद हो।
इसलिए खुद को रोका,न आगे बढ़ा
बेवजह मुस्कुराना अस॔भव लगा।


